गंगा दशहरा (Ganga Dashahra)
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हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। दान-पुण्य की दृष्टि से इसका विशेष महत्व होता है। दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने और जरूरतमंद लोगों को दान करने का विशेष धार्मिक महत्व होता है। हिंदू मान्यता के अनुसार इस दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से सारे पापों का अंत हो जाता है।
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि महाराज सगर जिनके 60 हजार पुत्र कपिल मुनि के गुस्से से भस्म हो गए थे। जब कपिल मुनि तपस्या में बैठे तब इन्होंने इन पर चोरी का आरोप लगाया था। तपस्या भंग होते ही महाराज सगर के 60 हजार पुत्रों को क्रोधित अवस्था में आंख खोलते ही जलाकर भस्म कर दिए थे। जब महाराज सगर के उपाय पूछने पर कपिल मुनि ने बताया कि स्वर्ग में रहने वाली मां गंगा यदि पृथ्वी पर उतर आए तो तुम्हारे पुत्रों का मोक्ष प्राप्त हो सकता है।
मां गंगा को पृथ्वी में लाने के लिए सगर के पुत्र भगीरथ ने बहुत कठिन तपस्या की। उनके तपस्या के प्रभाव से मां गंगा साक्षात स्वयं भगीरथ के पीछे-पीछे आईं। इसलिए उनको भागीरथ गंगा भी कहते हैं। गंगा मैया के पृथ्वी पर आने के दिन को हम गंगा दशहरा के रूप में मनाते हैं। गंगा मैया उस समय महाराज सगर के 60 हजार पुत्रों को तारी थीं। तब से मां गंगा आज पर्यंत नित्य ही हर लोगों के लिए पुण्यदायिनी, मोक्षदायिनी और बहुत ही पवित्र हैं। हर किसी को गंगा दशहरा के मौके पर गंगा नदी में "हर हर गंगे जय मां गंगे" जपते स्नान कर मां गंगा की पूजा करनी चाहिए।
दीन-दुखी और जरुरतमंदों को दान अवश्य देना चाहिए। इस दिन श्रद्धालुजन जिस भी वस्तु का दान करते हैं उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करते हैं उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए। ऎसा करने से शुभ फलों में और अधिक वृद्धि होती है। गंगा दशहरे का फल ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है। इन दस पापों में तीन पाप कायिक, चार पाप वाचिक और तीन पाप मानसिक होते हैं इन सभी से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है।
हर हर गंगे जय मां गंगे
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Jai Ganga Maiya
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